Mar 172014
 

Ashtalakshmi Stotram is addressed to the the eight different forms of Lakshmi. Lakshmi is considered as one who showers Aishwaryam or prosperity on Her devotees. Prosperity or Aishwaryam does not mean just financial riches. It is all riches; riches of happiness, good health, physical strength, valour, food, children, education, knowledge & intelligence and success in all endeavours. Thus by chanting this stotram one can attain all the good things in life.

ASHTALAKSHMI STOTRAM IN Latin Script

தமிழில் அஷ்டலக்ஷ்மீ ஸ்தோத்ரம்

आदिलक्ष्मि
सुमनस वन्दित सुन्दरि माधविचन्द्र सहोदरि हेममये 
मुनिगण वन्दित मोक्षप्रदायनिमञ्जुल भाषिणि वेदनुते । 
पङ्कजवासिनि देव सुपूजितसद्गुण वर्षिणि शान्तियुते 
जय जयहे मधुसूदन कामिनिआदिलक्ष्मि परिपालय माम् ॥ 

धान्यलक्ष्मि
अयिकलि कल्मष नाशिनि कामिनिवैदिक रूपिणि वेदमये 
क्षीर समुद्भव मङ्गल रूपिणिमन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते ।
मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनिदेवगणाश्रित पादयुते 
जय जयहे मधुसूदन कामिनिधान्यलक्ष्मि परिपालय माम् ॥ 

धैर्यलक्ष्मि
जयवरवर्षिणि वैष्णवि भार्गविमन्त्र स्वरूपिणि मन्त्रमये 
सुरगण पूजित शीघ्र फलप्रदज्ञान विकासिनि शास्त्रनुते । 
भवभयहारिणि पापविमोचनिसाधु जनाश्रित पादयुते 
जय जयहे मधु सूधन कामिनिधैर्यलक्ष्मी परिपालय माम् ॥ 

गजलक्ष्मि
जय जय दुर्गति नाशिनि कामिनिसर्वफलप्रद शास्त्रमये 
रधगज तुरगपदाति समावृतपरिजन मण्डित लोकनुते । 
हरिहर ब्रह्म सुपूजित सेवितताप निवारिणि पादयुते 
जय जयहे मधुसूदन कामिनिगजलक्ष्मी रूपेण पालय माम् ॥ 

सन्तानलक्ष्मि
अयिखग वाहिनि मोहिनि चक्रिणिरागविवर्धिनि ज्ञानमये 
गुणगणवारधि लोकहितैषिणिसप्तस्वर भूषित गाननुते ।
सकल सुरासुर देव मुनीश्वरमानव वन्दित पादयुते 
जय जयहे मधुसूदन कामिनिसन्तानलक्ष्मी परिपालय माम् ॥ 

विजयलक्ष्मि
जय कमलासिनि सद्गति दायिनिज्ञानविकासिनि गानमये 
अनुदिन मर्चित कुङ्कुम धूसरभूषित वासित वाद्यनुते । 
कनकधरास्तुति वैभव वन्दितशङ्करदेशिक मान्यपदे 
जय जयहे मधुसूदन कामिनिविजयलक्ष्मी परिपालय माम् ॥ 

विद्यालक्ष्मि
प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गविशोकविनाशिनि रत्नमये 
मणिमय भूषित कर्णविभूषणशान्ति समावृत हास्यमुखे ।
नवनिधि दायिनि कलिमलहारिणिकामित फलप्रद हस्तयुते 
जय जयहे मधुसूदन कामिनिविद्यालक्ष्मी सदा पालय माम् ॥ 

धनलक्ष्मि
धिमिधिमि धिन्धिमि धिन्धिमिदिन्धिमिदुन्धुभि नाद सुपूर्णमये 
घुमघुम घुङ्घुम घुङ्घुम घुङ्घुमशङ्ख निनाद सुवाद्यनुते ।
वेद पूराणेतिहास सुपूजितवैदिक मार्ग प्रदर्शयुते 
जय जयहे मधुसूदन कामिनिधनलक्ष्मि रूपेणा पालय माम् ॥ 

फलशृति
श्लो॥ अष्टलक्ष्मी नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि । 
विष्णुवक्षः स्थला रूढे भक्त मोक्ष प्रदायिनि ॥

श्लो॥ शङ्ख चक्रगदाहस्ते विश्वरूपिणिते जयः ।
जगन्मात्रे च मोहिन्यै मङ्गलं शुभ मङ्गलम् ॥

 

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